“सकारात्मक पत्रकारिता – वर्तमान समय की जरूरत” 

“सकारात्मक पत्रकारिता  वर्तमान समय की जरूरत” विषय पर उतराखंड के कई सेवास्थानों पर मीडिया डायलोग के कार्यक्रम रखे गये! जिसमें बतौर मुख्य वक्ता प्रो. कमल दीक्षित पत्रकारिता के पूर्व विभागाध्यक्ष माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय, भोपाल ने अपने विचार व्यक्त किये ! समाज के व्यवहार व सोच को सबसे ज्यादा मीडिया ही प्रभावित करता है। आज भी पत्रकारिता समाज को बदलने की ताकत रखता है। सकारात्मक पत्रकारिता समय की आवश्यकता है। यदि मीडिया समाज की अच्छाई को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करे तो निश्चित तौर पर समाज में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।

इसके साथ साथ दैवी भ्राता सुशांत, राष्ट्रीय संयोजक, मीडिया प्रभाग, दिल्ली और दैवी भ्राता कर्मचंद जी, कोर्डिनेटर, मीडिया प्रभाग, पंजाब जोन, मोहाली ने भी अपने विचार व्यक्त किये!ब्रह्माकुमारी उषा बहन ने मैडिटेशन कराया! डायलोग का संचालन ब्रह्माकुमारी सरिता ने किया!

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असंध (हरियाणा )—जे. पी. एस. पब्लिक स्कूल में नैतिक मूल्यों का जीवन महत्त्व पर कार्यक्रम

 

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असंध (हरियाणा )—जे. पी. एस. पब्लिक स्कूल में नैतिक मूल्यों का जीवन महत्त्व पर कार्यक्रम

आयोजक स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र असंध  (हरियाणा )

मुख्य वक्ता —ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू

विषय –- नैतिक मूल्यों का जीवन में महत्व  

प्राचार्य श्री मोहन   सिंह

बी के उषा  बहन स्थानीय ब्रह्माकुमारी  असंध  (हरियाणा )   

बी के तेजस भाई ,विजय शर्मा,महावीर भाई और सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे

कार्यक्रम के अंत में राजयोग का अभ्यास कराया गया

बी के भगवान् भाई ने कहा कि भौतिक शिक्षा से हम रोजगार प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन परिवार, समाज, कार्यस्थल में परेशानी या चुनौती का मुकाबला नहीं कर सकते।उन्होंने कहा की  नैतिक मूल्यों से व्यक्तित्व में निखार, व्यवहार में सुधार आता है।नैतिक मूल्यों का ह्रास व्यक्तिगत, सामाजिक, राष्ट्रीय समस्या का मूल कारण है। समाज सुधार के लिए नैतिक मूल्य जरूरी है।उन्होंने कहा कि नैतिक शिक्षा की धारणा से, आंतरिक सशक्तीकरण से इच्छाओं को कम कर भौतिकवाद की आंधी से बचा जा सकता है। व्यक्ति का आचरण उसकी जुबान से ज्यादा तेज बोलता है। लोग जो कुछ आंख से देखते हैं। उसी की नकल करते हैं।

 

भगवान् भाई ने कहा कि हमारे जीवन में श्रेष्ठ मू््ल्य है तो दूसरे उससे प्रमाणित होते हैं।जीवन में नैतिक मूल्य होंगे तो आदमी लालच, हिंसा, झूठ, कपट का विरोध

करेगा और समाज में परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा नैतिकता से मनोबल कम होता है। मूल्यों की शिक्षा से ही हम जीवन में विपरीत परिस्थिति का सामना कर

सकते हैं। जब तक हम अपने जीवन में मूल्यों और प्राथमिकता का निर्धारण नहीं करेंगे, अपने लिए आचार संहिता नहीं बनाएंगे तब तक हम चुनौतियों का

मुकाबला नहीं कर सकते। चरित्र उत्थान और आंतरिक शक्तियों के विकास के लिए आचार संहिता जरूरी है। उन्होंनेे अंत में नैतिक मूल्यों का स्रोत आध्यमित्कता को बताया। जब तक आध्यात्मिकता को नहीं अपनाएंगे जीवन में मूल्यों की धारणा संभव नहीं है।

एस मोके पर असंध सेवाकेंद्र कि इंचार्ज बी के उषा बहन ने कहा  के वर्तमान में बच्चो को अच्छे संस्कार कि आवश्यकता है उन्होंने बताया कि संस्कारित बच्चे देश कि सच्ची सम्पति है

INTERNATIONAL YOGA DAY 2016

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Samarpan Samaroh

 

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